Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स।किसी atom में electron की सही position और energy को determine करने के लिए 4 integers का उपयोग किया जाता हैं।जिन्हें quantum numbers कहते हैं।ये 4 quantum numbers निम्नलिखित हैं-

Principal quantum numbers

Azimuthal quantum numbers

Magnetic quantum numbers

Spin quantum numbers।

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

इन quantum numbers में से 3 quantum numbers(Principal, Azimuthal, Magnetic) Schrodinger  equation को हल करने पर प्राप्त होती हैं।
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Schrodinger  equation को 3 equations में divide करने पर 3 constant n,l,व m प्राप्त होते हैं। जो quantum numbers कहलाते हैं।

वह equation जो केवल π पर depend करती हैं। Principal quantum numbers(n)देती हैं।वह equation जो polar coordinates (θ) पर depend करती हैं।

Azimuthal quantum numbers(l) देती हैं। तथा वह equation जो गोलीय निर्देशांक( Φ) पर depend करती हैं,Magnetic quantum numbers(m)देती हैं।

4th quantum numbers Schrodinger equation के हल से नहीं बल्कि spectroscopy मापन से प्राप्त होती हैं।

what are four quantum number

(1) मुख्य क्वांटम संख्या ,n(Principal quantum numbers)

यह किसी दी हुई कक्षा के energy level तथा nucleus से उस कक्षा की दूरी को बताता हैं।

इसे n से शो करते हैं।यह main bohr model के मुख्य कोशों (orbit)को दर्शाता हैं।

इसकी  value 1,2,3,4……..आदि कोई भी integer हो सकता हैं।

n का मान बढने से electron की energy और उसके कोश की radius बढती हैं।

n की value  1,2,3,4,5,6 व 7 प्राप्त हुए हैं,जिन्हें क्रमशः K,L,M,N,O,P और Q अक्षरों से भी show करते हैं।EXAMPLE के लिए n=2 हैं तो इसका मतलब यह हैं कि electron दूसरी कक्षा में हैं।

n = 1 का मतलब हैं LOWEST level अर्थात,n = 2 का मतलब हैं K-shell से NEXT energy level अर्थात L-shell,n = 3 का मतलब हैं M-shell,n = 4 का मतलब हैं N-shell

किसी electron की Principal quantum numbers(n) ज्ञात करने के लिए यह देखते हैं कि वह electron atom के किस कोश में विधमान हैं।

यदि M-कक्षा में हैं तो उस electron की Principal quantum numbers(n) 3 होगी(n = 3)।

Principal quantum numbers(n) को  atom के electronic configuration में subshell के symbol से पूर्व में लिखा जाता हैं।

जैसे Na के electronic configuration में subshell s,p आदि  से पूर्व लिखे गए अंक 1,2,3 आदि Principal quantum numbers(n) को दर्शाते हैं-1S2,2S2,3S1

quantum number and its significance

n (Principal quantum numbers) का महत्त्व –

1.यह electron की nucleus से औषत  दुरी show करता हैं।

(r ∝ x2) अर्थात यह electron cloud के आमाप को determine करता हैं।एक electron युक्त atom या आयन के different कोशों की radius को निम्न फार्मूला से ज्ञात करते हैं:

r = 0.529 n2/Z

2.यह किसी कक्षा में electron की energy determine करता हैं(E∝-1/n2)।atom के किसी कोश में present electron की energy निम्न सूत्र से ज्ञात करते  हैं।

En= – 2π2 mZ2 e4/n2 h2

उपर्युक्त equation से स्पस्ट हैं कि n का value बढने से E की value घटती  हैं।

hydrogen तथा अन्य आयन जैसे He+,Li2+ आदि जिनमे एक electron होता हैं ।

उपर्युक्त equation से प्राप्त result satisfactory होते हैं किन्तु poly electronic atoms के लिए approximate value प्राप्त होती हैं।

3. यह main कोश में electrons की संख्या देता हैं ।

एक मुख्य कोश अथवा कक्ष में maximum 2n2 electron रह सकते हैं,example के लिए –

n = 1 (K-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 12 =2

n = 2 (L-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 22 =8

n = 3(M-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 32 =18

n = 4 (N-shell) तो maximum number of  electrons  =   2 * 42 =32

azimuthal quantum numbers and orbital

इसे (l) से show करते हैं तथा किसी electron के subshell (उप उर्जा स्तर ) को भी show करता हैं।यह किसी मुख्य कोश से related subshell की संख्या को भी show करता हैं।

(l) की value Principal quantum numbers (n) पर depend करते हैं। n के किसी मान के लिए l के मान से 0 से लेकर (n-1) तक होते हैं। (l) के मान इस प्रकार हैं-

Orbital L के मान
S 0
P 1
D 2
F 3

जब n = 1 तो l का मान = 0 से (1 – 1) = 0 ( only एक subshell(orbital ),S)

जब n = 2 तो l का मान = 0 से (2 – 1) = 0,1 (दो  subshell(orbital ),S and P)

जब n = 3  तो l का मान = 0 से (3 – 1) = 0,1,2 ( तीन  subshell(orbital ),S,P and d )

जब n = 4  तो l का मान = 0 से (4 – 1) = 0,1,2,3 ( चार  subshell(orbital ),S,P,d and f )

अत: इन मानो से यह show होता हैं कि first कक्षा में एक subshell,second में दो, third में 3 और फोर्थ में 4 subshell होते हैं ।

azimuthal quantum numbers is related to

(l) के अधिक से अधिक 4 मान हो सकते हैं,इसलिए 5th कक्ष में भी 4 subshell हो सकते हैं।

यदि किसी subshell की द्विगंशी quantum number 2 हैं तो इसका अर्थ d subshell या d उप उर्जा स्तर से होता हैं ।

किसी एक subshell को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए दो quantum numbers ‘n’ तथा ‘l’ की need होती हैं,

जैसे p केवल p-subshell को show करता हैं जबकि 4p लिखने से निश्चित रूप से show करता हैं

कि यह फोर्थ कक्षा की p subshell हैं।

यह quantum number subshell के कक्षकों की आकृति को भी निर्धारित करता हैं ।

इस quantum number से nucleus के चारों ओर electron cloud का आकाशीय डिस्ट्रीब्यूशन तथा electron के कोणीय संवेग का ज्ञान होता हैं।

इसलिए इसे कभी-कभी कोणीय संवेग quantum number भी कहते हैं।

azimuthal quantum numbers energy level

यदि l = 0 तब इसका mean S subshell से होता हैं जो कि spherical होता हैं ।

इसी प्रकार l = 1 होने पर यह  p subshell होता हैं जो कि dumbell shape का होता हैं।

तथा l = 2 होने पर d subshell होता हैं जो कि double dumbell आकार का होता हैं। l = 3 होने पर f-subshell होता हैं जो जटिल shape का होता हैं।

different subshell या उप उर्जा स्तर को show करने वाले अक्षर s,p,d और f atom स्पेक्ट्रम में पाए जाने वाली different रेखाओं को सूचित करने वाले words-

Sharp(स्फुट),principal(मुख्य),diffused (अस्फुट) और fundamental(मोलिक )से लिए गए हैं।

किसी कोश के s,p.d और f चारों subshell में s subshell की उर्जा सबसे कम तथा f subshell  की सबसे अधिक होती हैं।अत: l का मान -(i) मुख्य कोश में subshell की संख्या ,(ii) किसी electron का subshell,(iii) subshell की आकृति तथा (iv) subshell में electrons की संख्या (4n+2) determine करता हैं।

what is magnetic quantum number significance

इसे चुम्बकीय या दिशामान quantum संख्या इसे m से प्रदर्शित करते हैंयह किसी subshell के electron cloud का विभिन्न फील्ड में ओरिएंटेशन को व्यक्त करता हैं ।इन विभिन्न ओरिएंटेशन को कक्षक (orbital)कहते है।अत:यह किसी subshell में उपस्थित कक्षकों की संख्या एवं अभिविन्यास प्रदर्शित करती हैं।

m के  मान azimuthal quantum number (l ) पर निर्भर करते हैं ।किसी (l ) के लिए m के कुल मान

m = -1, 0 , +1

यदि l = 0  तो m = 0

l = 1 तो      m = -1 , 0, +1

l = 2 तो      m =  -2,-1,0,+1 ,+2

इस प्रकार (l ) के मान  के लिए m के सम्पूर्ण मानो की संक्या  (2l +1) होती हैं।अत: यदि l = 2 तो m = 2 * 2 +1 = 5 अर्थात d subshell (l = 2) में कक्षकों की कुल संख्या 5 होगी। जिसके मान इस प्रकार होंगे-

-2,-1,0.+1,+2

किसी भी परमाणवीय कक्षक में विपरीत स्पिन के अधिक से अधिक 2 electron रह सकते हैं ।अत:s,p,d व f -subshell में अधिकतम 2,6,10,14 electron रह सकते हैं।

उप उर्जा स्तर द्विगंशी क्वांटम संख्या,l चुम्बकीय क्वांटम संख्या,m कक्षकों की कुल संख्या(2l+1) इलेक्ट्रानों की संख्या
S 0 0 1 2
P 1 -1,0,+1 3 6
D 2 -2,-1,0,+1,+2 5 10
F 3 -3,-2,-1,0,+1,+2,+3 7 14

m के मान की हेल्प से किसी उपकोश में कक्षकों की संख्या तथा उनका ओरिएंटेशन ज्ञात किया जा सकता हैं।जैसे  जब (l = 1),तब m  के 3 मान होगे जिन्हें -1,0,+1 से व्यक्त करते हैं।अत:p-subshell (l = 1) में 3 कक्षक होते हैं जो चुम्बकीय क्षेत्र में भिन्न-भिन्न दिशाओं में अर्थात x,y व z अक्षों के प्रति अभिविन्यस्त होते हैं ।इसलिए इन्हें px,py व pz से दर्शाया जाता हैं।

जीमन प्रभाव और स्टार्क प्रभाव 

नोट:यह क्वांटम संख्या जीमन प्रभाव की व्याख्या करती हैं ।जब रेखिल स्पेक्ट्रम उत्पन्न करने वाले source को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो रेखिल स्पेक्ट्रम की प्रत्येक रेखा कई पतली रेखाओं में बंट जाती हैं।इस प्रभाव को  जीमन प्रभाव कहते हैं। इस प्रकार का विघटन विधुत क्षेत्र में भी होता हैं जिसे स्टार्क प्रभाव कहते हैं।

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स
Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Spin Quantum Numbers-प्रचक्रण क्वांटम संख्या 

यह किसी electron का उसके अक्ष पर होने वाले प्रचक्रण की दिशा (क्लॉक वाइज  या एंटीक्लॉक वाइज  )को प्रकट करता हैं।इसे S से प्रदर्शित करते हैं ।यह स्पिन भी electron की उर्जा पर प्रभाव डालता हैं।जीमन प्रभाव और स्टार्क प्रभावों से प्राप्त स्पेक्ट्रम की रेखाएं सिंगल न होकर दो सिंगल रेखाओं से मिलकर बनी होती हैं जो किअपनी जोड़ी में बहुत निकट होती हैं।

इनकी व्याख्या करने के लिए यह सुझाव दिया की नाभिक के चारो तरफ किसी कक्षा में घूमता हुआ electron अपने स्वयं के अक्ष पर भी लट्टू के समान घूमता रहता हैं ।इस क्रिया को प्रचक्रण कहते हैं।

electron का प्रचक्रण दो दिशाओं दक्षिणावर्त तथा वामावर्त में ही संभव हैं।electron के प्रचक्रण की दिशा को व्यक्त करने के लिए एक अन्य quantum संख्या का प्रयोग किया जाता हैं,जिसे प्रचक्रण  quantum  संख्या कहते हैं।

Spin Quantum Numbers significance

किसी एक कक्षक में अधिक से अधिक दो electron रह सकते हैं।और प्रचक्रण भी दो प्रकार के होते हैं,अत: एक ही कक्षक में रहने वाले दो electrons के स्पिन विपरीत दिशा में होते हैं ।

इन दोनों electrons की प्रचक्रण गति से उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण के मान में एक इकाई का अंतर होता हैं इसलिए चक्रण quantum number के लिए दो ही मान +1/2 व -1/2  संभव होते हैं जिसे ↑ (clock wise ) और ↓ (anti clock wise) के चिह्नों के द्वारा प्रदर्शित करते हैं ।

s का मान m पर निर्भर करता हैं । किसी भी m के लिए s के दो मान होते हैं जो इस fact पर निर्भर करता हैं कि electron की spin दक्षिणावर्त या  वामावर्त हैं।किसी कक्षक के प्रथम electron के लिए यह +1/2या (↑) होता हैं और दुसरे electron के लिए  -1/2 या (↓) होता हैं ।

अत: चक्रण quantum number से किसी electron के स्पिन की दिशा का ज्ञान होता हैं तथा इसके द्वारा किसी परमाणु या आयन के चुम्बकीय गुणों की व्याख्या होती हैं ।

 Inorganic Chemistry for JEE 

 

 

Dvi Angi Yaugik kya Hain-द्वि-अंगी यौगिक क्या हैं?

Dvi Angi Yaugik kya Hain-द्वि-अंगी यौगिक क्या हैं?एक द्विआधारी यौगिक (या दो-तत्व यौगिक) एक रासायनिक यौगिक है जिसमें केवल दो अलग-अलग रासायनिक तत्व होते हैं।कुछ अधातु तत्व जैसे C,N,P,O तथा S प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व से क्रिया कर द्वि-अंगी यौगिक बनाते हैं|

Dvi Angi Yaugik kya Hain-द्वि-अंगी यौगिक क्या हैं?

कार्बाइड 

कार्बाइडो को मेटल के साथ उच्च ताप (2000-2200 )या मेटल ऑक्साइड्स के सात C को गरम करके प्राप्त करते है|

Se2O3 +7C—–>2ScC2+ 3CO

प्रथम संक्रमण श्रेणी के एलिमेंट दो प्रकार के कार्बाइड बनाते हैं|

1.साल्ट लाइक कार्बाइड

2.इंटर स्टीशियल कार्बाइड 

1.साल्ट लाइक कार्बाइड

  • स्कैंडियम कार्बाइड:स्कैंडियम ऑक्साइड को कार्बन के साथ हीट करके प्राप्त करते हैं|

Se2O3 +7C—–>2ScC2+ 3CO

इसे स्कैंडियम ऐसीटिलाइड (ScC2)भी कहलाता हैं|यह  जल  के साथ रिएक्शन कर  ऐसीटिलीन बनाता हैं|

  • कॉपर कार्बाइड :इसे क्यूप्रस क्लोराइड के अमोनिकल सलूशन में ऐसीटिलीन प्रवाहित करके प्राप्त किया जाता हैं|

2CuCl +2NH4OH +C2H2……..>Cu2C2 +2NH4Cl+2H2O

                          कॉपर ऐसीटिलाइड

यह अम्लों के साथ ऐसीटिलीन देता हैं|

Cu2C2 +2HCl——>C2H2 +2CuCl

  • जिंक कार्बाइड: निम्नलिखित विधिओं से पाप्त किया जाता हैं|

 

 

 

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?.4 F और 5 F के level, जिनमें से प्रत्येक में 14 इलेक्ट्रॉन होते हैं|और इस प्रकार इसमें दो Horizontal chains होती हैं| जिनमें से प्रत्येक में 14 तत्व होते हैं|और उनकी स्थिति आमतौर पर आवर्त सारणी के नीचे अलग होती है| क्योंकि उनके गुण संक्रमण तत्वों के गुणों से सहमत नहीं हैं।। ये दो chains एक्टिनाइड्स chain और लैंथेनाइड chain हैं।कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स के प्रमुख गुण

प्रमुख बिंदु

लैंथेनाइड और एक्टिनाइड श्रृंखला आंतरिक संक्रमण धातुओं को बनाते हैं।

लैंथेनाइड श्रृंखला में 58 से 71 तक के तत्व शामिल हैं, जो उत्तरोत्तर 4f उपशीर्ष भरते हैं।

एक्टिनाइड्स 89 से 103 तक के तत्व हैं और उत्तरोत्तर रूप से अपने 5f का आकार लेते हैं।

एक्टिनाइड्स विशिष्ट धातुएं हैं और इनमें डी-ब्लॉक और एफ-ब्लॉक तत्वों दोनों के गुण हैं, लेकिन वे रेडियोधर्मी भी हैं।

लैंथेनाइड में संक्रमण धातुओं से अलग रसायन विज्ञान है क्योंकि उनके 4f ऑर्बिटल्स परमाणु के वातावरण से परिरक्षित हैं।

1. लैंथेनाइड्स श्रृंखला

14 Rare Earth Elements लैंथेनाइड श्रृंखला में  होते हैं|जो आवर्त सारणी में सेरियम से 58 तक 71 की परमाणु संख्या के साथ शुरू होते हैं|और कुछ वैज्ञानिक उन्हें तत्व लैंथेनम 57 से जोड़ते हैं| लैंथेनाइड श्रृंखला का नाम तत्व लैंथेनम को show करता है| हालांकि यह इसमें नहीं पाया जाता है (कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार)। लैंथेनाइड श्रृंखला के बाद एक्टिनाइड श्रृंखला है।

लैंथेनाइड श्रृंखला में क्रमिक तत्वों की एक श्रृंखला होती है जिसमें Fऑर्बिटल आंशिक रूप से या पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनों से भरा होता है, जबकि बाहरी ऑर्बिटल्स खाली होते हैं।

लैंथेनाइड श्रृंखला को आवर्त सारणी के तहत रखा गया है। लंबी आवर्त सारणी लैंथेनाइड समूह के वास्तविक स्थान को दर्शाती है।

2.एक्टिनाइड श्रृंखला

परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ, पूर्णता 5 F स्तर से नीचे जारी है। यह एक्टिनियम के बाद सातवें चक्र में स्थित है और थोरियम से शुरू होता है और तत्व नोबेलियम के साथ समाप्त होता है।

एक्टिनाइड्स को रेडियोधर्मी तत्व भी कहा जाता है क्योंकि सभी को उनके गैर-न्यूक्लिएशन के परिणामस्वरूप रेडियोधर्मिता द्वारा विशेषता है।

यूरेनियम के बाद, वे ऐसे तत्व हैं जिनका निर्माण परमाणु रिएक्टरों में न्यूट्रॉन या हेलियम या कार्बन जैसे प्रकाश तत्वों के प्रोटॉन के साथ भारी तत्वों के नाभिक पर बमबारी करके किया गया था।

इसमें लैंथेनाइड श्रृंखला तत्वों के समान गुण हैं। उच्च परमाणु संख्या वाले एक्टिनाइड्स प्रकृति में मौजूद नहीं होते हैं और उनका आधा जीवन होता है और एक्टिनाइड्स की श्रृंखला को आवर्त सारणी के तहत रखा जाता है जैसे कि वे इसके परिशिष्ट थे।

जबकि लंबी आवर्त सारणी वास्तविक स्थान को दर्शाती है

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

18 वीं शताब्दी के अंत में, वाई गडोलिन ने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के समूह, यट्रियम ऑक्साइड से पहला यौगिक प्राप्त यह लैंथेनम और हेफ़नियम के बीच आवर्त सारणी में मौजूद था।

एक अन्य रासायनिक तत्व, जैसे एक्टिनियम, जैसे लैंथेनम, 14 रेडियोधर्मी रासायनिक तत्वों का एक परिवार बनाता है जिसे एक्टिनाइड्स कहा जाता है। उनकी खोज विज्ञान में 1879 से बीसवीं सदी के मध्य तक हुई।

लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स में भौतिक और रासायनिक गुणों में कई समानताएं हैं। यह इन धातुओं के परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था द्वारा समझाया जा सकता है, जो ऊर्जा के स्तर पर मौजूद हैं|

यानी, लैंथेनाइड्स के लिए, यह F स्तर से चौथा स्तर है, और एक्टिनाइड्स के लिए F स्तर से पांचवां स्तर है।

एमवी लोमोनोसोव द्वारा रासायनिक संरचना की शानदार खोज परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन के गोले के आगे के अध्ययन का आधार थी।

एक रासायनिक तत्व के प्राथमिक कण संरचना के रदरफोर्ड के मॉडल, एम। प्लैंक और एफ। गुंड के अध्ययन ने रासायनिक वैज्ञानिकों को भौतिक और रासायनिक गुणों में आवधिक परिवर्तनों में वर्तमान परिवर्तनों के लिए सही स्पष्टीकरण खोजने की अनुमति दी, जो कि लेलेनहाइड और एक्टिनाइड्स की विशेषता है।

संक्रमण तत्वों के परमाणुओं की संरचना का अध्ययन करने में डी.मेन्डलेव के आवधिक कानून की महत्वपूर्ण भूमिका को अनदेखा करना असंभव है। आइए हम इस मुद्दे पर अधिक विस्तार से ध्यान दें।

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

छठे काल के तीसरे समूह में – सबसे लंबे समय तक – प्रवेश के लिए सेरियम से लेक्टेरियम तक स्थित खनिजों का एक समूह है।

लैंथेनम परमाणु के लिए, 4f सुबल खाली है, और ल्यूटेटियम के लिए यह पूरी तरह से 14 इलेक्ट्रॉनों से भरा है। उनके बीच के तत्व धीरे-धीरे एफ ऑर्बिटल्स को भरते हैं।

एक्टिनाइड परिवार में, थोरियम से लॉरेंस तक, नकारात्मक रूप से चार्ज कणों के संचय का एक ही सिद्धांत केवल अंतर के साथ मनाया जाता है

: इलेक्ट्रॉनों को 5f सुबल में भरा जाता है। बाहरी ऊर्जा स्तर की संरचना और उस पर नकारात्मक कणों की संख्या (दो के बराबर) उपरोक्त सभी खनिजों के लिए समान हैं।

यह तथ्य इस सवाल का जवाब देता है कि क्यों लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स, जिन्हें अंतर्जात संक्रमण तत्व कहा जाता है, में इतनी समानताएं हैं।

लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स को आवर्त सारणी के बाकी हिस्सों से अलग किया जाता है, जो आमतौर पर तल पर अलग-अलग पंक्तियों के रूप में दिखाई देते हैं। इस नियुक्ति का कारण इन तत्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास के साथ करना है।

Kaise Jaane Lanthanides-Actinides?कैसे जानें लैंथेनाइड्स-एक्टिनाइड्स?

जब आप आवर्त सारणी को देखते हैं, तो आपको तत्वों के 3B सेट में अजीब प्रविष्टियाँ दिखाई देंगी। 3B समूह धातु-तत्वों के परिवर्तन की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है।

समूह 3 बी की तीसरी पंक्ति में तत्व 57 (लैंटानम) और तत्व 71 (लुटेटियम) के बीच सभी तत्व शामिल हैं।

इन तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है और लैंथेनाइड्स कहा जाता है। इसी तरह, 3 बी समूह की चौथी पंक्ति में तत्वों 89 (एक्टिनियम) और तत्व 103 (लॉरेंस) के बीच तत्व शामिल हैं। इन तत्वों को एक्टिन के रूप में जाना जाता है।

समूह 3 बी और 4 बी के बीच अंतर

सभी लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स ग्रुप 3 बी से संबंधित क्यों हैं? इसका उत्तर देने के लिए, हम 3B और 4B समूह के बीच के अंतर को देखते हैं।

3 बी तत्व उनके इलेक्ट्रॉनिक वितरण में डी इलेक्ट्रॉन शेल को भरना शुरू करने वाले पहले तत्व हैं। समूह 4 बी दूसरा है, क्योंकि अगला इलेक्ट्रॉन डी 2 शेल में रखा गया है।

उदाहरण के लिए, एक 3 डी [आरोन] 1 4 एस 2 के इलेक्ट्रॉन विन्यास के साथ स्कैंडियम पहला तत्व 3 बी है। अगला तत्व एक इलेक्ट्रॉन वितरण [आरोन] 3 डी 2 4 एस 2 के साथ समूह 4 बी में टाइटेनियम है।

इलेक्ट्रॉन वितरण [खमेर रूज] 4 डी 1 5 एस 2 और जिरकोनियम इलेक्ट्रान वितरण [खमेर रूज] 4 डी 2 5 एस 2 के साथ यट्रियम के बीच भी यही बात लागू होती है।

समूह 3 बी और 4 बी के बीच का अंतर डी खोल के लिए एक इलेक्ट्रॉन के अतिरिक्त है।

Lanthanum में अन्य 3B तत्वों की तरह एक डी 1 इलेक्ट्रॉन होता है, लेकिन d 2 तत्व 72 (हैफियम) तक एक इलेक्ट्रॉन नहीं दिखाता है। पिछली पंक्तियों में व्यवहार के आधार पर, तत्व 58 को एक डी 2 इलेक्ट्रॉन भरना चाहिए|

लेकिन इसके बजाय, इलेक्ट्रॉन पहले और इलेक्ट्रॉन खोल को भरता है। 5 डी इलेक्ट्रॉन दूसरे के लिए भर जाने से पहले सभी लैंथेनाइड तत्व 4F इलेक्ट्रॉन शेल को भरते हैं। चूंकि सभी लैंथेनाइड्स में 1 डी का 5 डी होता है, वे 3 बी समूह के होते हैं।

इसी तरह, एक्टिन्स में 6D 1 इलेक्ट्रॉन होता है और 6D 2 इलेक्ट्रॉन को भरने से पहले 5F का कटोरा भरते हैं। सभी एक्टिनियां समूह 3 बी से संबंधित हैं।

आवर्त सारणी के मुख्य भाग में 3B समूह में इन सभी तत्वों को रास्ता देने के बजाय मुख्य कोशिका शरीर में कोड के साथ लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स को नीचे व्यवस्थित किया गया है।

इलेक्ट्रॉनों और शेल के कारण, इन दो तत्व समूहों को तत्वों और एक ब्लॉक के रूप में भी जाना जाता है।

लैंथेनाइड्स का उपयोग

  • लैंथेनाइड्स का उपयोग-धातुओं को ताकत और कठोरता प्रदान करने में|
  • सेरियम है, को लैंथेनम, नियोडिमियम और प्रेजोडियम मिश्र धातुओं के रूप में मिलाया जाता है
  • कच्चे तेल की रिफाइनिंग के लिए पेट्रोल उद्योग में
  • ऑप्टिकल उपकरणों जैसे कि लेजर बीम,नाइट विजन गॉगल्स, और फॉस्फोरसेंट सामग्री में एर्बियम का उपयोग किया जाता हैं|

एक्टिनाइड्स का उपयोग

  • एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी हैं। इन तत्वों का उपयोग ऊर्जा स्रोतों के रूप में किया जा सकता है|
  • कार्डियक पेसमेकर-चंद्रमा पर उपकरणों के लिए विद्युत ऊर्जा का उत्पादन करते हैं।
  • यूरेनियम और प्लूटोनियम को परमाणु हथियारों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में|

एक्टिनाइड्स और लैंथेनाइड्स के बीच अंतर

  1. लैंथेनाइड्स 4f- ऑर्बिटल्स
  2. एक्टिनॉइड 5f-ऑर्बिटल्स
  3. बंधन ऊर्जा-4f इलेक्ट्रॉनों <5f-इलेक्ट्रॉनों |
  4. परिरक्षण प्रभाव-4f-इलेक्ट्रॉनों>5f-इलेक्ट्रॉनों
  5. लैंथेनॉइडपैरामैग्नेटिक लेकिन एक्टिनॉइड  में यह स्पष्टीकरण कठिन है।
  6. सभी एक्टिनाइडरेडियोधर्मी हैं।प्रोमेथियम को छोड़कर लैंथेनाइड प्रकृति में गैर-रेडियोधर्मी हैं|