Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स।किसी atom में electron की सही position और energy को determine करने के लिए 4 integers का उपयोग किया जाता हैं।जिन्हें quantum numbers कहते हैं।ये 4 quantum numbers निम्नलिखित हैं-

Principal quantum numbers

Azimuthal quantum numbers

Magnetic quantum numbers

Spin quantum numbers।

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

इन quantum numbers में से 3 quantum numbers(Principal, Azimuthal, Magnetic) Schrodinger  equation को हल करने पर प्राप्त होती हैं।
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Schrodinger  equation को 3 equations में divide करने पर 3 constant n,l,व m प्राप्त होते हैं। जो quantum numbers कहलाते हैं।

वह equation जो केवल π पर depend करती हैं। Principal quantum numbers(n)देती हैं।वह equation जो polar coordinates (θ) पर depend करती हैं।

Azimuthal quantum numbers(l) देती हैं। तथा वह equation जो गोलीय निर्देशांक( Φ) पर depend करती हैं,Magnetic quantum numbers(m)देती हैं।

4th quantum numbers Schrodinger equation के हल से नहीं बल्कि spectroscopy मापन से प्राप्त होती हैं।

what are four quantum number

(1) मुख्य क्वांटम संख्या ,n(Principal quantum numbers)

यह किसी दी हुई कक्षा के energy level तथा nucleus से उस कक्षा की दूरी को बताता हैं।

इसे n से शो करते हैं।यह main bohr model के मुख्य कोशों (orbit)को दर्शाता हैं।

इसकी  value 1,2,3,4……..आदि कोई भी integer हो सकता हैं।

n का मान बढने से electron की energy और उसके कोश की radius बढती हैं।

n की value  1,2,3,4,5,6 व 7 प्राप्त हुए हैं,जिन्हें क्रमशः K,L,M,N,O,P और Q अक्षरों से भी show करते हैं।EXAMPLE के लिए n=2 हैं तो इसका मतलब यह हैं कि electron दूसरी कक्षा में हैं।

n = 1 का मतलब हैं LOWEST level अर्थात,n = 2 का मतलब हैं K-shell से NEXT energy level अर्थात L-shell,n = 3 का मतलब हैं M-shell,n = 4 का मतलब हैं N-shell

किसी electron की Principal quantum numbers(n) ज्ञात करने के लिए यह देखते हैं कि वह electron atom के किस कोश में विधमान हैं।

यदि M-कक्षा में हैं तो उस electron की Principal quantum numbers(n) 3 होगी(n = 3)।

Principal quantum numbers(n) को  atom के electronic configuration में subshell के symbol से पूर्व में लिखा जाता हैं।

जैसे Na के electronic configuration में subshell s,p आदि  से पूर्व लिखे गए अंक 1,2,3 आदि Principal quantum numbers(n) को दर्शाते हैं-1S2,2S2,3S1

quantum number and its significance

n (Principal quantum numbers) का महत्त्व –

1.यह electron की nucleus से औषत  दुरी show करता हैं।

(r ∝ x2) अर्थात यह electron cloud के आमाप को determine करता हैं।एक electron युक्त atom या आयन के different कोशों की radius को निम्न फार्मूला से ज्ञात करते हैं:

r = 0.529 n2/Z

2.यह किसी कक्षा में electron की energy determine करता हैं(E∝-1/n2)।atom के किसी कोश में present electron की energy निम्न सूत्र से ज्ञात करते  हैं।

En= – 2π2 mZ2 e4/n2 h2

उपर्युक्त equation से स्पस्ट हैं कि n का value बढने से E की value घटती  हैं।

hydrogen तथा अन्य आयन जैसे He+,Li2+ आदि जिनमे एक electron होता हैं ।

उपर्युक्त equation से प्राप्त result satisfactory होते हैं किन्तु poly electronic atoms के लिए approximate value प्राप्त होती हैं।

3. यह main कोश में electrons की संख्या देता हैं ।

एक मुख्य कोश अथवा कक्ष में maximum 2n2 electron रह सकते हैं,example के लिए –

n = 1 (K-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 12 =2

n = 2 (L-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 22 =8

n = 3(M-shell) तो maximum number of  electrons   =  2 * 32 =18

n = 4 (N-shell) तो maximum number of  electrons  =   2 * 42 =32

azimuthal quantum numbers and orbital

इसे (l) से show करते हैं तथा किसी electron के subshell (उप उर्जा स्तर ) को भी show करता हैं।यह किसी मुख्य कोश से related subshell की संख्या को भी show करता हैं।

(l) की value Principal quantum numbers (n) पर depend करते हैं। n के किसी मान के लिए l के मान से 0 से लेकर (n-1) तक होते हैं। (l) के मान इस प्रकार हैं-

Orbital L के मान
S 0
P 1
D 2
F 3

जब n = 1 तो l का मान = 0 से (1 – 1) = 0 ( only एक subshell(orbital ),S)

जब n = 2 तो l का मान = 0 से (2 – 1) = 0,1 (दो  subshell(orbital ),S and P)

जब n = 3  तो l का मान = 0 से (3 – 1) = 0,1,2 ( तीन  subshell(orbital ),S,P and d )

जब n = 4  तो l का मान = 0 से (4 – 1) = 0,1,2,3 ( चार  subshell(orbital ),S,P,d and f )

अत: इन मानो से यह show होता हैं कि first कक्षा में एक subshell,second में दो, third में 3 और फोर्थ में 4 subshell होते हैं ।

azimuthal quantum numbers is related to

(l) के अधिक से अधिक 4 मान हो सकते हैं,इसलिए 5th कक्ष में भी 4 subshell हो सकते हैं।

यदि किसी subshell की द्विगंशी quantum number 2 हैं तो इसका अर्थ d subshell या d उप उर्जा स्तर से होता हैं ।

किसी एक subshell को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए दो quantum numbers ‘n’ तथा ‘l’ की need होती हैं,

जैसे p केवल p-subshell को show करता हैं जबकि 4p लिखने से निश्चित रूप से show करता हैं

कि यह फोर्थ कक्षा की p subshell हैं।

यह quantum number subshell के कक्षकों की आकृति को भी निर्धारित करता हैं ।

इस quantum number से nucleus के चारों ओर electron cloud का आकाशीय डिस्ट्रीब्यूशन तथा electron के कोणीय संवेग का ज्ञान होता हैं।

इसलिए इसे कभी-कभी कोणीय संवेग quantum number भी कहते हैं।

azimuthal quantum numbers energy level

यदि l = 0 तब इसका mean S subshell से होता हैं जो कि spherical होता हैं ।

इसी प्रकार l = 1 होने पर यह  p subshell होता हैं जो कि dumbell shape का होता हैं।

तथा l = 2 होने पर d subshell होता हैं जो कि double dumbell आकार का होता हैं। l = 3 होने पर f-subshell होता हैं जो जटिल shape का होता हैं।

different subshell या उप उर्जा स्तर को show करने वाले अक्षर s,p,d और f atom स्पेक्ट्रम में पाए जाने वाली different रेखाओं को सूचित करने वाले words-

Sharp(स्फुट),principal(मुख्य),diffused (अस्फुट) और fundamental(मोलिक )से लिए गए हैं।

किसी कोश के s,p.d और f चारों subshell में s subshell की उर्जा सबसे कम तथा f subshell  की सबसे अधिक होती हैं।अत: l का मान -(i) मुख्य कोश में subshell की संख्या ,(ii) किसी electron का subshell,(iii) subshell की आकृति तथा (iv) subshell में electrons की संख्या (4n+2) determine करता हैं।

what is magnetic quantum number significance

इसे चुम्बकीय या दिशामान quantum संख्या इसे m से प्रदर्शित करते हैंयह किसी subshell के electron cloud का विभिन्न फील्ड में ओरिएंटेशन को व्यक्त करता हैं ।इन विभिन्न ओरिएंटेशन को कक्षक (orbital)कहते है।अत:यह किसी subshell में उपस्थित कक्षकों की संख्या एवं अभिविन्यास प्रदर्शित करती हैं।

m के  मान azimuthal quantum number (l ) पर निर्भर करते हैं ।किसी (l ) के लिए m के कुल मान

m = -1, 0 , +1

यदि l = 0  तो m = 0

l = 1 तो      m = -1 , 0, +1

l = 2 तो      m =  -2,-1,0,+1 ,+2

इस प्रकार (l ) के मान  के लिए m के सम्पूर्ण मानो की संक्या  (2l +1) होती हैं।अत: यदि l = 2 तो m = 2 * 2 +1 = 5 अर्थात d subshell (l = 2) में कक्षकों की कुल संख्या 5 होगी। जिसके मान इस प्रकार होंगे-

-2,-1,0.+1,+2

किसी भी परमाणवीय कक्षक में विपरीत स्पिन के अधिक से अधिक 2 electron रह सकते हैं ।अत:s,p,d व f -subshell में अधिकतम 2,6,10,14 electron रह सकते हैं।

उप उर्जा स्तर द्विगंशी क्वांटम संख्या,l चुम्बकीय क्वांटम संख्या,m कक्षकों की कुल संख्या(2l+1) इलेक्ट्रानों की संख्या
S 0 0 1 2
P 1 -1,0,+1 3 6
D 2 -2,-1,0,+1,+2 5 10
F 3 -3,-2,-1,0,+1,+2,+3 7 14

m के मान की हेल्प से किसी उपकोश में कक्षकों की संख्या तथा उनका ओरिएंटेशन ज्ञात किया जा सकता हैं।जैसे  जब (l = 1),तब m  के 3 मान होगे जिन्हें -1,0,+1 से व्यक्त करते हैं।अत:p-subshell (l = 1) में 3 कक्षक होते हैं जो चुम्बकीय क्षेत्र में भिन्न-भिन्न दिशाओं में अर्थात x,y व z अक्षों के प्रति अभिविन्यस्त होते हैं ।इसलिए इन्हें px,py व pz से दर्शाया जाता हैं।

जीमन प्रभाव और स्टार्क प्रभाव 

नोट:यह क्वांटम संख्या जीमन प्रभाव की व्याख्या करती हैं ।जब रेखिल स्पेक्ट्रम उत्पन्न करने वाले source को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो रेखिल स्पेक्ट्रम की प्रत्येक रेखा कई पतली रेखाओं में बंट जाती हैं।इस प्रभाव को  जीमन प्रभाव कहते हैं। इस प्रकार का विघटन विधुत क्षेत्र में भी होता हैं जिसे स्टार्क प्रभाव कहते हैं।

Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स
Quantum Number And Atomic Orbitals-क्वांटम संख्या और परमाणु ऑर्बिटल्स

Spin Quantum Numbers-प्रचक्रण क्वांटम संख्या 

यह किसी electron का उसके अक्ष पर होने वाले प्रचक्रण की दिशा (क्लॉक वाइज  या एंटीक्लॉक वाइज  )को प्रकट करता हैं।इसे S से प्रदर्शित करते हैं ।यह स्पिन भी electron की उर्जा पर प्रभाव डालता हैं।जीमन प्रभाव और स्टार्क प्रभावों से प्राप्त स्पेक्ट्रम की रेखाएं सिंगल न होकर दो सिंगल रेखाओं से मिलकर बनी होती हैं जो किअपनी जोड़ी में बहुत निकट होती हैं।

इनकी व्याख्या करने के लिए यह सुझाव दिया की नाभिक के चारो तरफ किसी कक्षा में घूमता हुआ electron अपने स्वयं के अक्ष पर भी लट्टू के समान घूमता रहता हैं ।इस क्रिया को प्रचक्रण कहते हैं।

electron का प्रचक्रण दो दिशाओं दक्षिणावर्त तथा वामावर्त में ही संभव हैं।electron के प्रचक्रण की दिशा को व्यक्त करने के लिए एक अन्य quantum संख्या का प्रयोग किया जाता हैं,जिसे प्रचक्रण  quantum  संख्या कहते हैं।

Spin Quantum Numbers significance

किसी एक कक्षक में अधिक से अधिक दो electron रह सकते हैं।और प्रचक्रण भी दो प्रकार के होते हैं,अत: एक ही कक्षक में रहने वाले दो electrons के स्पिन विपरीत दिशा में होते हैं ।

इन दोनों electrons की प्रचक्रण गति से उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण के मान में एक इकाई का अंतर होता हैं इसलिए चक्रण quantum number के लिए दो ही मान +1/2 व -1/2  संभव होते हैं जिसे ↑ (clock wise ) और ↓ (anti clock wise) के चिह्नों के द्वारा प्रदर्शित करते हैं ।

s का मान m पर निर्भर करता हैं । किसी भी m के लिए s के दो मान होते हैं जो इस fact पर निर्भर करता हैं कि electron की spin दक्षिणावर्त या  वामावर्त हैं।किसी कक्षक के प्रथम electron के लिए यह +1/2या (↑) होता हैं और दुसरे electron के लिए  -1/2 या (↓) होता हैं ।

अत: चक्रण quantum number से किसी electron के स्पिन की दिशा का ज्ञान होता हैं तथा इसके द्वारा किसी परमाणु या आयन के चुम्बकीय गुणों की व्याख्या होती हैं ।

 Inorganic Chemistry for JEE 

 

 

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